tola durga kehav ke maa kali charo dham me tore hai ujaari

तोला दुर्गा कहंव के मां काली,
चारों धाम में तोरे है उजारी,
ओ माता रानी
का मैं चढ़ावंव तोला, दर्शन दे माता मोर..

चंद्रपुर में चंद्रसेनी कहाये तैं,
रायगढ़ मा बूढ़ी माई हो,
घूघरा नरवा मा बइठे हस काली बन के,
हरदी के गौंटिन दाई वो..

सारंगढ़ मा तैं समलाई,
ढोलेसरा के तैं बंजारी,
ओ मां भवानी,
का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

तोर लईका दाई, रोवत हौं तोर बर..
तोर बर मैं उदास हौं..
विनती ल सुन ले माता, सुन ले गुहार वो..
राख ले अंचरा के छांव वो..

तोर बिना ये मोर जिन्दगानी..
जइसे सावन होथे बिन पानी..
ओ माता रानी..
का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

देखत हौं चारो ओर, डहार नइ दिखै तोर..
कहां लुकागे महामाई तैं..
आंसू बरसगे दाई, चोला तरसगे वो..
कइसे पीर सुनाव मैं..

मोर नैना के प्यास बुझा दे..
तोर दर्शन बिना नइ बाचंव..
बचा ले दाई..
का मैं चढ़ावंव तोला.. दर्शन दे माता मोर..

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