ऊंचा है मंदिर माँ का चांदी का द्वार
चरणों मे माँ के झुकता संसार

दरबार तेरा मैय्या किसने बनाया ,किसने देखा पहली बार
दरबार तेरा भक्तों ने बनाया, अंधे गुजर ने देखा पहली बार

दरबार तेरे पे मैय्या कौन कौन आया, कौन कौन मैय्या लाया उपहार
दर तेरे पे शंकराचार्य आये, चाणक्य चंद्रगुप्त लाये उपहार

मूरतमान हो तू बैठी जगदंबा, सिहांसन सोहे बाहरी हिमालय जात
भीमा, भ्रामरी और शताक्षी, बीच सिंहासन शाकुम्भर मात

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