तुम्हें प्रीत मेरी निभानी पड़ेगी,
मुझे श्याम अपना बनाकर तो देखो,
बिछा दूंगा पलकें राहों में तेरी,
कभी मेरी कुटिया में आकर तो देखो ,

ये दहलीज घर की तुम्हें ही पुकारे ,
आजा कन्हैया गरीबों के द्वारे ,
भला हूँ बुरा हूँ मैं जैसा हूँ तेरा ,
मेरी गलतियों को छुपाकर तो देखो ,

मैं नरसी नहीं हूँ नहीं हूँ सुदामा ,
मगर श्याम तुमको पड़ेगा निभाना,
तुम्हारे चरण में पड़ा हूँ मैं दात्ता ,
जरा अपनी नजरें झुका कर तो देखो,

ये किस बात की तुम सजा दे रहे हो ,
खाटू में बैठे मजा ले रहे हो ,
नहीं भूल पाओगे हमें श्याम सुंदर,
नहीं जो यकीं तो भुला कर तो देखो ,

मेरा जिस्मों – जां अब अमानत है तेरी ,
मैं तेरा रहूँगा जमानत है मेरी ,
अगर जान मांगो तो अभी जान दे दूँ,
कभी ” नरसी ” को आजमा कर तो देखो ,

Leave a Reply