tumhari virha me maat bhawani bhatk raha hu meri maa

तुम्हरी विरहा में मात भवानी भटक रहा हु मेरी माँ,
पर तुम छुपी हो कहा,
इक बार माये दर्श दिखा दे मैं तर जाऊँगा,
तुम्हरी विरहा में मात भवानी भटक रहा हु मेरी माँ,

कैसे तुम्हे पाउ माई समजा ना आये सूजे न रास्ता कोई कोई उपाए ,
मंदिर मंदिर खोज रहा हु पर तुम मिली न वाहां,
तुम्हरी विरहा में मात भवानी भटक रहा हु मेरी माँ,

जानू न पूजा तेरी तेरा ना पाठ माँ,
कोई न साथ मेरे किसी का ना हाथ माँ,
मुझको तेरा बस है आसरा माँ,
इक बार दर्श दिखा,
तुम्हरी विरहा में मात भवानी भटक रहा हु मेरी माँ,

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