tu jo bhi dena chahe de de mere sarkaar

इस जीवन के तुम जीवन हो
बृजचन्द्र तुम्हे कैसे समझाएं
दुखी होता बहुत तुम्हारे बिना
कैसे दिल अपना चीर दिखाएँ…..

तेरे फूलों से भी प्यार तेरे कांटो से भी प्यार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार

तेरी मर्ज़ी में विधाता कोई छुपा बड़ा राज़
दुनिया चाहे हमसे रूठे तू ना होना नाराज़
तुझे वंदन है बार बार हमको करले तू स्वीकार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार

हमको दोनों है पसंद तेरे धुप और छाँव
डाटा किसी भी दिशा में ले चल ज़िन्दगी की नाव
चाहे हमें लगादे पार या डुबादे बीच मंझधार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार

चाहे सुख दे या दुःख चाहे ख़ुशी दे या ग़म
मालिक जैसे भी रखेगा वैसे रह लेंगे हम
चाहे हंसी भरा संसार चाहे आंसुओं की धार
तू जो भी देना चाहे दे दे मेरे सरकार
तेरे फूलों से भी प्यार…………

कृष्ण भजन