दादी तेरे चरणों से लिप्त जाऊ धूल बन के,
तेरे चरणों को छू लू माँ ज्वा का फूल बन के,

किस्मत से इन फूलो को माँ सेवा तेरी मिली है,
देख तेरे चरणों को छू कर हर इक कलि खली है,
आज तेरे स्वागत में ओ दादी मैं बिछाउ पलके,
तेरे चरणों को छू लू माँ ज्वा का फूल बन के,

लाल लाल है दादी मेरी लाल है फूल ज्वा का,
अभिषेक करने का हमको आज मिला है मौका,
दादी तेरे कीर्तन में के नाचू मैं तो मोर बन के,
तेरे चरणों को छू लू माँ ज्वा का फूल बन के,

लाल ज्वा फूलो में दादी भगतो का है प्यार भरा,
बड़े प्रेम से लाये है माँ करले न स्वीकार जरा,
सौरव मधुकर भी फूल तेरे अंचल के,
तेरे चरणों को छू लू माँ ज्वा का फूल बन के,

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