श्याम साथो दूर ना, पर साडा वी कसूर ना,
देखन वाली अख जेह्डी उस विच नूर ना,

शाम मिलन दा डंग निराला,सुनी जरा कन लाके,
ऐ नुस्खा तेनु बतलावा वरत ला इस नु जा के,
ओ वरत ला इस नु जा के
श्याम साथो दूर ना, पर साडा वी कसूर ना,

भगति रुपी सुरमा लेके , लै खरल विच पाले ओ , लै खरल विच पा ले,
प्रेम दुपटिया नाल रगड़ के, खूब बरीक बना ले ओ , खूब बरीक बना ले,
शाम साथो दूर ना, पर साडा वी कसूर ना…

दासी ने जद सुरमा पाया, हो गया उजाला ,
निकल गया अज्ञान दा पानी..
जद श्याम दा दर्शन पाया..
श्याम साथो दूर ना, पर साडा वी कसूर ना,

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