लड़ गई लड़ गई लड़ गई,
श्याम नाल अख्ख लड़ गई ll
अख्ख लड़ गई, मेरी अख्ख लड़ गई ll
होए,,लड़ गई लड़ गई,,,,,,,,,,,,

खड़ी खड़ी मैं, खिड़ खिड़ हस्सां
लोकी पूछन, की की दस्सां
होए,, बिन पीऐ ही चढ़ गई,
श्याम नाल अख्ख लड़ गई
अख्ख लड़ गई, मेरी अख्ख लड़ गई
होए,,लड़ गई लड़ गई,,,,,,,,,,,,

न विच मंदिर, न ही मसीतां
न जाना तू, जान हरी का
होए,, यार दी पल विच बन गई,
श्याम नाल अख्ख लड़ गई
अख्ख लड़ गई, मेरी अख्ख लड़ गई
होए,,लड़ गई लड़ गई,,,,,,,,,,,,

लुकदी फिरदी, न मैं पल पल
जांदी पई सां, मन्दिराँ पल पल
हुए,, जांदी जांदी पड़ गई,
श्याम नाल अख्ख लड़ गई
अख्ख लड़ गई, मेरी अख्ख लड़ गई
होए,,लड़ गई लड़ गई,,,,,,,,,,,

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