shiv shankar dhaan todo he daya nidhi kholi neyan

द्वार पे तेरे ए है हम तुम तो हो अशरण अशरण,
शिव शंकर धान तोड़ो हे दया निधि खोली नयन,

द्वार द्वार भटके है सिर हजार पटके है,
हर किसी की चोकाठ पे खाए सिर्फ झटके है,
तीनो लोको में बाबा इक तू ही दानी है,
बिन तुम्हरे ओ भगवन प्राण हीन प्राणी है,
मद और मोह माया में ये जहान उल्जा है,
मुक्ति मिल गई उसको जिसने तुझको समजा है,
मन हमारा भटके तो नाथ तुम दिशा देना,
जब तुम्हे पुकारे हम रूप तुम दिखा देना,
ज्योत जला दे मन में ताकी तुझमे हो जाये मग्न,
शाम सवेरे सारा जीवन गाये तेरा भजन,
शिव शंकर धान तोड़ो हे दया निधि खोली नयन,

मिटने वाली दुनिया में जो भी है वो नश्वव्रर है,
इक तू ही अवनाशी तू ही सब का इश्वर है,
जिसने प्रेम से फेरी तेरे नाम की माला,
उस के हर अमंगल को तूने है प्रभु टाला,
नाथ तुम करुनासिंधु करुनके निधान हो देवता करे परनाम इतने तुम महान हो,
पूजा अरचाना कुछ भी हम नही है जानते,
तेरे नाम को ही हम महा मंत्र मानते,
हम भगतो का कोटि कोटि तुझको है प्रभु नमन,
इक पल न भूले तुझको इसी दो हमें लग्न,
शिव शंकर धान तोड़ो हे दया निधि खोली नयन,

सचा है तू तेरा सचा दरबार है हर तरफ तुम्हारी ही होती जय जय कार है,
न्यारी तेरी महिमा है भंग तेरे न्यारे है,
तुम तो भक्त वस्ल हो भगत तुझको प्यारे है,
जिस को तुम निहारते होता वो निहाल है,
फिर उसे सताए कौन किसी ये मजाल है,
तुम बड़े दयालु हो सब की बोली सुनते हो,
जो भी दर पे आता है उसकी झोली भरते हो,
आज हमारी भर दे झोली देदे प्रीत की किरण
हम तुम्हारे वास्ते है लाये श्रधा की सुमन,
शिव शंकर धान तोड़ो हे दया निधि खोली नयन,

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शिव भजन