पौणाहारी बाबा जी रखी चरना दे कोल,
धुनें वालेया बाबा जी रखी चरना दे कोल,
रखी चरना दे कोल रखी चरना दे कोल,
दुधाधारी बाबा जी रखी……

मेरी फरयाद तेरे दर अगे होर सुनावा किह्नु,
खोल न दफ्तर ऐबा वाले दर तो थके न मेनू,
दर तो थके न मेनू जोगी दर तो थके न मेनू,
चिमटे वालेया बाबा जी रखी….

तेरे जेहा मेनू होर न जोगी मेरे जेहे लख तेनु,
जे मेरे विच ऐब न हुँदै तू बख्सेंदा कहणु,
तू बख्सेंदा कहणु,तू बख्सेंदा कहणु,
सिंगियाँ वालेया बाबा जी रखी,,,,,,,

जे ऑगन वेखे पौनाहारी ता कोई न मेरी थाऊ,
जे ते रोम शरीर दे उस तो वध गुनाहों,
उस तो वध गुनाहों,उस तो वध गुनाहों,
पाऊआ वालेया बाबा जी रखी……

औखे वेले कोई नही न बाबुल वीर न मावा,
सबे थके देवदे मेरी कोई न पकड़े बाहवा
मेरी कोई न पकड़े बाहवा,कोई न पकड़े बाहवा,
झोली वालेया बाबा जी रखी….

वेख न लेख मथे दे मेरे कर्मा ते न जावी,
रखी लाज विरद दी बाबा अपनी भगती लावी,
अपनी भगती लावी,अपनी भगती लावी,
गाऊआ वालेया बाबा जी रखी……

उचे पर्वत चड चड वेखा बिट बिट अखी झाका,
दर्द विछोड़े नाथ वाले मैं रो रो मारा हाका,
मैं रो रो मारा हाका,मैं रो रो मारा हाका,
सिंगिया वालेया बाबा जी रखी….

रस्ते दे विच पौनाहारी एह दिल फ़र्स विछावा,
सोहने चरण तुहाडे जोड़ा एह दोवे नैन बनावा,
एह दोवे नैन बनावा,एह दोवे नैन बनावा,
धुनें वालेया बाबा जी रखी….

विशड गया तेरे चरना तो मैं खोट्या कर्मा करके,
दूधाधारी मेनू बक्श लवो तुसी अपनी किरपा करके
अपनी किरपा करके अपनी किरपा करके
पौनाहारी बाबा जी ………..

औगुन हारे की वेनती सुनो गरीब नवाज,
जो मैं पूत कपूत हु तोहे पिता को लाज,
तोहे पिता को लाज नाथ जी तोहे पिता को लाज,
चिमटे वालेया बाबा जी

बाबा बालक नाथ भजन