paapon ka ghada bhar jaye to

आए जो देने पे तो लाख करोड़ देता है
पापों का घड़ा भर जाए तो साईं फोड़ देता है

साईं की शान निराली,खुशियाँ बरसाने वाली
आया जो दर पे सवाली,लौटा न कोई खाली
संकट से जीवन की नैया को मोड़ देता है

चाहे कितना भी धन हो,औरों को मत दिखलाना
गर मिल जाए जो शोहरत,उड़ने न कहीं लग जाना
उड़ने वाले बन्दों को बाबा छोड़ देता है

साईं ऐसा है दाता,ये सबका भाग्यविधाता
बन के भक्तों का सहारा,हर मुश्किल में है आता
बिखरे सपनों को बाबा पल में जोड़ देता है

जो साईं नित जपता है,श्रद्धा अर्पित करता है
उस दीवाने की साईं,पल में झोली भरता है
‘मोहित’ हो कर कष्टों के बन्धन तोड़ देता है

साईं भजन