मोहन तेरे दर से मैं खाली नहीं जाऊंगा,
तेरा होकर तुझको, अपना कर जाऊंगा,

सब कहते हैं मोहन, तुम बड़े दयालु हो,
भक्तों के तन मन धन, तुम बड़े कृपालु हो,
एक बार चले आओ फिर में न बुलाऊंगा,
मोहन तेरे दर से मैं…..

भक्तों को तारा तुमने, तो क्या उपकार किया,
भक्तों ने तो भक्ति से तुम को साकार किया,
मुझको तारों तो मैं कुछ मान भी जाऊंगा,
मोहन तेरे दर से मैं…..

तेरी रहमत ने माधव, पाषाण भी तारे हैं,
फिर क्यों तेरे दर्शन को हम यूं तरसाए हैं,
इतने निष्ठुर न बनो, मैं कैसे रिझाऊंगा,
मोहन तेरे दर से मैं…..

इतना तो बता दो मुझे कब तक इंतजार करूं,
ख्वाबों में सही तुमको, जी भरकर प्यार करूं,
दिन गिन-गिन कर एक दिन, तुमको मैं पाऊंगा ,
मोहन तेरे दर से मैं..

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