मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,
वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में

याहा दुआ की सदा खुली दूकान,
बन के सेठ बैठे है साई किरपा निधान,
नित दे रहे है सब को बिन मोल यहाँ बंदो,
जितनी चाहे लेलो बिन तोल याहा बंदो,
धन भाव नहीं मन भाव करते साई इस व्यपार में,
वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,
मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

भगति याहा मिलती मुक्ति यहाँ भगतो,
शक्ति यहाँ मिलती युक्ति यहाँ मिलती,
दया किरपा की तो धार सदा बहती,
सुख समृदि साई के चरणो मे रहती,
सुख का सूरज चमके है ऐसे दुःख के अन्धकार में,
वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,
मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

हर व्यागि की मिलती यहाँ दवा हर दम,
खुशिया मिले मन को हो दूर सभी गम,
झोली सतगुरु की दिन रात यहाँ जलती,
है भभूति जिस की हर विपदा को हरती,
कमी नहीं कुछ भी साई दाता के भण्डार में,
वो सब मिलता है साई देवा के दरबार में,
मिले न जो इस दुनिया के मायावी बाजार में,

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साईं भजन