मेरी मियां ने किया उपकार माँ घर मेरे आई है,
जोट जलाऊ गई चुनरी चड़ाउ गी आंबे मैया को मन से मनाऊ गी,
बड़ा सूंदर सजा दरबार खुशियां छाई है,
मेरी मियां ने किया उपकार माँ घर मेरे आई है,

सिंगसन पे माँ को बिठाऊ गी हलवा पूरी भोग लगाऊ गी,
करे मैया के सोला शृंगार मैं माँ को मनाऊ गी,
मेरी मियां ने किया उपकार माँ घर मेरे आई है,

मैया के हाथो में मेहँदी रचाऊ गी,
सखियों के संग में गरबा गाउ गी,
लुंगी मैया की नजरि उतार,मैं आरती उतारू गी,
मेरी मियां ने किया उपकार माँ घर मेरे आई है,

गंगा जल से माँ के चरण पखारूगी व्रत मैं रखूगी,
लुंगी मैया से आशीष हज़ार तृप्ति प्रेम से रिजाऊ गी,
मेरी मियां ने किया उपकार माँ घर मेरे आई है,

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