maiya ki mehfil ko maiya sajaati hai kismat valo ke ghar me maiya aati hai

मैया की महफ़िल को मैया सजाती है,
किस्मत वालो के घर में मैया आती है,

गहरा हो नाता मैया का जिनसे,
मिलने को मैया आती है उनसे ,
उनकी यह साथी बन जाती है ..

किरपा बरसती है जिस पे इसकी ,
तकदीर लिखती हाथों से उसकी ,
गम का अँधेरा छट जाता है

भजन सुनते जो इसको प्यारे,
उनके तो परिवार के वारे न्यारे,
मंदिर सा घर बन जाता है

कुछ भी असंभव होता नहीं है,
महफ़िल में इनकी होता यही है,
” आनंद ” सब यहाँ मिल जाता है

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