ताहना मेहना लस्सी रोटी दा दे बेठी हो के मजबूर
पता नही सी ऐनी भूल ने जोगी मेंथो सी कर देना दूर,
जय कार पौनाहारी दा बोल साचे दरबार की जय,

आजा जोगियां वे तेनु सोहं मेरे प्यार दी,
तेरे दर्श दीदार नु माँ रतनो पुकारदी,
आजा जोगियां वे……

मैं जद वी देखा चार चुफेरे तेनु ही बस देखा,
हूँ आया तू आया जोगियां पेंदा तेरा भुलेखा,
जंगला च घूम घूम तेरा राह निहारदी.
आजा जोगियां वे ………..

उडीक तेरी विच पुतरा वे मैं फिरदी झलम झली,
तेरे वाजो हो गई हां मैं बिलकुल कलम कली,
तेरे तो बिना मैं वांग मोया वक़्त गुजार्दी,
आजा जोगियां वे ………..

तेरे मुख चो एको कण माँ सुनन नु तरसन,
प्रगत हो के जोगी ने फिर दिते माँ नु दर्शन,
छड के तू मेनू कली ना गल कर जांदी,
आजा जोगियां वे ………..

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