kalaashi ga marghat vashi bne havy tiriya tripurari gaa

कैलाशी गा मरघट वाशी ॥
बने हावय तिरिया त्रिपुरारी गा
गउरा बनेहे राधा रानी।
मोहना कन्हया माँ भवानी।
सुनले कहानी गा ॥ वेद के बानी गा॥

एक समय दाई पारबती संग,भोला अवघड दानी गा,
किंजरत हे कैलाश के बन म,जुग जुग दुनो परानी गा,
गउरी के सुघ्घर रूप ल देखे,बोले संभु सुजानि गा,
तिरिया बने के आस हे मोला,पिरथीलोक म शिवानी गा,
महू बनजातेव अइसे नारी।
जइसे तै हावस मोर सुवारी।
गउरा के साधेहे गा ॥ अचरज लागे गा॥

शिव के गोढ़ ल सुनके उमाहर,हरसाये बड़ भारी गा,
तोर हींछा के मान ह होही,अरथाये महतारी गा,
तिरथाजुग म तै राधा होबे,मैहर मदन मुरारी गा
आठो मुरति घलो अवतरही,बनके गोपी नियारी गा
अइसे बधाये हे करारी।
बिधिना के माया हे अपारी।
अगम चरित्तर गा ॥ कथा बिचितर गा॥

कमल पुल म राधा बनके,जनमें हे शिव संकर गा,
महामाया सगरो सक्ति हर,किसना गुवाल उजागर गा,
किसम किसम के लीला करेहे,मन भावन सुख सागर गा,
अइसे शिव के मनसा पुराये,मिरतुलोक के भितर गा,
राधा किसना माया के चिन्हारी।
नाव के महिमा हे अपारी।
गौतम गाले गा ॥ पाप धोवाले गा॥

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