jogi de naal gallan kitiyan

जी मैं सुपना सुनावा कल रात दा,
जोगी/बाबे दे नाल गल्ला कितियाँ,
गल्ला कितियाँ जी मैं सुनावा बितियाँ,
जी मैं सुपना सुनावा……

पौनाहारी बाबा आये मेरे वेहड़े,
चानन होया चार चुफेरे,
नि मैं शगुन मनावा उस रात दा,
जोगी दे नाल गल्ला कितियाँ
जी मैं सुपना सुनावा……..

जी मैं कोल जोगी दे बैह गई,
पता लगाया ना की की गल्ला कह गई,
वेला मिलिया सबबी मुलाक़ात दा,
जोगी दे नाल गल्ला कितियाँ
जी मैं सुपना सुनावा……..

जी मैं दर्श बाबे दा पा लिया,
बाह फड् के मैं कोल बिठा लिया,
जी मैं रोम रोम हरसा लिया,
जोगी दे नाल गल्ला कितियाँ
जी मैं सुपना सुनावा……..

जी मेनू चड़ गई नाम खुमारी ,
भूल गई मेनू सुध भूध सारी,
अख खुली ता वेला सी परभात दा,
जोगी दे नाल गल्ला कितियाँ
जी मैं सुपना सुनावा……

Leave a Comment