जित देखो तित श्याम मयी है,
श्याम कुंज बन मधुवन श्यामा श्याम गगन घन घटा छई हैं,

चंद्र सार रविसार श्याम है मृगमद श्याम काम विजयी है,
श्रुति को अक्षर श्याम देखियत दीपसिखा पर श्याम तई है,

मैं बौरी की लोगन ही की श्याम पुतरिया बदल गई है ,
नर देवन की कौन बात है अलख ब्रह्म छवि श्याम मई है,

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