जयति जय गायत्री माता तुम हो वेद पुराणों की ज्ञाता
सारे जगत में प्रकाश ज्ञान का तुमने ही तो फैलाया

सत्य सनातन रूप तुम्हारा हंसा तेरी सवारी
श्वेत शुध्द है वस्त्र तुम्हारे पुस्तक कमण्डल धारी
जो कोई ध्यान करे तुम्हारा दुःख और रोग निकट नहीं आये
मंत्र में तुम्हारी इतनी शक्ति अविद्या और पाप को भी भगाए
जयति जय —————

तुम्ही हो लक्ष्मी तुम्ही सरस्वती तुम्ही हो जग जननी भवानी
तुम्ही हो माता हर दिशा में तुमसे बढ़कर कौन जहाँ में
सारे गृह और नक्षत्र को तुमने ही गतिवान बनाया
तुमने ही ब्रह्माण्ड रचाया तुम्ही हो इसकी प्राण विधाता
जयति जय गायत्री माता

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