जय अंबे जागोद्धारिणी,
जय माते नारायणी,
जय हे दुर्गती हरिणी ,
जय जय हे व्याघ्रासिनी ॥

शुभमति दानी, शुभगति दानी,
भगवती भक्ति प्रदायिनी
मातृरूप धरी वरद शुभंकरी ,
माते चिन्मय रुपिणी ॥

सूरमुनी ध्यावत, पार न पावत,
जननी त्रिभुवन स्वामिनी
आद्या शक्ति दे भवमुक्ति,
माया मोह विनाशिनी ॥

हे गिरीनंदिनी विश्वविनोदिनी
विष्णू विलासिनी मोहिनी
शैलसुते हे रम्य कपर्दिनी
जय महिषासुर मर्दिनी ॥

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