hum dware maiya ke jayege daati ka darshan paayege

हम द्वार मैया के जाएंगे, दाती का दर्शन पाएंगे,
दाती का दर्शन पायेंगे, जयकारे खूब लगायेंगे,

झंडे पकड़े हाथों में माथे पे लाल चुनरिया रे भक्तो,
ऊंचा पर्वत लम्बा रस्ता टेड़ी बहुत डगरिया रे भक्तो,
हम ज़रा नहीं घबरायेंगे, जैकारे खूब लगायेंगे
और दौड़े दौड़े आयेंगे,
दाती……

दूर दूर से आये हैं माँ के भक्तों के टोले रे भक्तो,
नाचे गाये चलते जाये जय माँ जय माँ बोलें रे भक्तो,
हम मस्ती में खो जायेंगे, ध्यान मैया का लायेंगे,
और माँ से मुरादें पायेंगे,
दाती का दर्शन….

कंकर पत्थर और कांटों से पड़ेगा अपना पाला रे भक्तो,
आगे आगे चलता जायेगा करमां रोपड़ वाला रे भक्तो,
हम साथ सिंकंदर गाएंगे,और दर पे जोत जलायेंगे,
दाती का दर्शन……

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