हर इक सपने से सुंदर मेरा संसार है,
अपनों से भरा आंगन खुशियाँ हजार है,
मुझे कैसे छुये कोई गम थामे है हर कदम,
संग संग मेरे सदा अपनों का प्यार है,

सुबह देखि शामे देखि रातो को देखि चाँद सितारे,
देखा अपनों की आँखों से तो और भी प्यारे लगे नजारे,
और करू मैं क्या व्यान कैसे कहू मैं शुकरीयाँ,
जान लुटाऊ तो भी कम है एसा ये प्यार है,

हर इक सपने से सुंदर मेरा संसार है,
अपनों से भरा आंगन खुशियाँ हजार है,

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