ढोल बाजे माँ के भवन में नवराते आये,
चलो रे चलो भक्तो चलो माँ को आज मनाये,
ढोल बाजे माँ के भवन में

पहला रूप है शैलपुत्री का जो सब को वर देती,
दूजा रूप है ब्रह्मचारणी संकट ये हर लेती,
तीजी चंद्रघंटा मैया को सत सत शीश झुकाये,
चलो रे चलो भक्तो चलो माँ को आज मनाये,
ढोल बाजे माँ के भवन में

चौथे रूप कुष्मांडा ने ही ये संसार वसाया है,
रूप पांचवे को देखो तो सकन्द माँ का कहलाया है,
छठे रूप कयतानी को अपने घर पे भुलाये,
चलो रे चलो भक्तो चलो माँ को आज मनाये,
ढोल बाजे माँ के भवन में

सातवे काली माँ के रूप से काल भी घबराता है,
अष्ट रूप महागौरी का संताप से मुक्त कराता है,
नवम रूप सीधी दाती से हम भी सीधी पाये,
चलो रे चलो भक्तो चलो माँ को आज मनाये,
ढोल बाजे माँ के भवन में

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