dheere dheere ankhiyan maa khol rahi hai lagta hai maiyan kuch bol rahi hai

धीरे धीरे अँखियाँ माँ खोल रही है,
लगता है मईया कुछ बोल रही है,

दुनिया के नज़ारे तो बेजान लगते ,
सूरज चन्दा कौड़ी के समान लगते,
आत्मा में अमृत घोल रही है ,
लगता है मईया कुछ बोल रही है,

आएगी जरूर मईया आज सामने,
अपने भगतों का देखो हाथ थामने ,
मिलने का मौक़ा ये टटोल रही है ,
लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

लागे ना नजर मुझे हो रही फिकर ,
हीरे और मोती से उतार दूँ नजर ,
क्या करूँ मेरा तो ऐसा जोर नहीं है,
लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

बनवारी ऐसी तकदीर चाहिए ,
आत्मा में माँ की तस्वीर चाहिए ,
ऐसा ये असर दिल पे छोड़ रही है ,
लगता है मईया कुछ बोल रही है ,

Leave a Comment