aaja re kanhiya de na kar

हार है पर जीते गे सरकार तेरे द्वार में ,
तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,
आजा रे कन्हिया देर न कर अब आजा रे,

हार के आते जो तेरे दर पे देता उसे सहारा है,
शरण तेरी पा के मेरे बाबा हसता गम का मारा है
आज है बारी मेरी तेरे सेवक की लम्बी कतार में,
तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,

हम है नोकर तेरे द्वार के तू तो लख दातार है,
नैया हमारी तेरे भरोसे ओ नीले असवार है ,
आजा घोड़े चढ़ कर आजा मोर छड़ी ले हाथ में,
तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,

सुख में याद किया ना तुझको दुःख में आस लगाते है
कभी दुनिया सताए अपने रुलाये द्वार तेरे ही आते है,
सारा दोष है मेरा पर कत्पुलती तेरे हाथ के,
तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,

जो याहा हार गई तो बाबा और कहा मैं जाउगी,
डूब गई यो नाव मेरी दुखड़ा किसे सुनाऊ गी
रूचि की किस्मत बनाना बाबा बस तेरे ही हाथ में,
तेरे रेहते डूब न सकती नैया ये मजधार में,

कृष्ण भजन